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राज्योत्सव में बालको के पैवेलियन ने जीता द्वितीय पुरस्कार

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बालकोनगर। छत्तीसगढ़ राज्य के 21वें स्थापना दिवस पर आयोजित राज्योत्सव-2021 में भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) के पैवेलियन ने उत्कृष्ट साज-सज्जा और आकर्षक प्रस्तुति के लिए श्रेष्ठ पैवेलियन का द्वितीय पुरस्कार जीता। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके और कार्यक्रम अध्यक्ष छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के हाथों बालको की कंपनी संवाद प्रमुख सुश्री मानसी चौहान, सह प्रबंधक श्री विजय वाजपेयी और कॉरपोरेट अफेयर्स उप प्रबंधक श्री अजय पांडेय ने पुरस्कार ग्रहण किया। इस अवसर पर मंत्रीमंडल के सदस्यों सहित अनेक जन प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी मौजूद थे। राज्योत्सव रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित हुआ।
राज्योत्सव के दौरान मुख्यमंत्री श्री बघेल सहित अनेक जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने बालको के पैवेलियन का अवलोकन किया। पैवेलियन में मौजूद अधिकारियों ने आगंतुकों को बालको के अनेक सामुदायिक विकास कार्यों एवं एल्यूमिनियम निर्माण प्रक्रिया की जानकारी दी। प्रदर्शनी में आगंतुकों को वेदांता समूह की नंदघर परियोजना, नए राजधानी क्षेत्र के सेक्टर-36 में स्थापित बालको मेडिकल सेंटर, कोविड-19 के नियंत्रण में बालको के योगदान के अलावा शिक्षा उन्नयन, युवा स्वावलंबन, आधारभूत संरचना विकास संबंधी अनेक परियोजनाओं एवं एल्यूमिनियम निर्माण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी डिस्प्ले पैनलों एवं अनेक ब्रोशरों के जरिए दी गई। आगंतुकों ने बालको पैवेलियन की खूब सराहना की।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति ने पुरस्कार मिलने पर बालको परिवार को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ के नागरिकों को राज्य और राष्ट्र की उत्तरोत्तर प्रगति में बालको के योगदान से अवगत कराया गया। अपनी स्थापना के साढ़े पांच दशकों में बालको ने चहमुंखी प्रगति के नए आयाम स्थापित किए हैं। बालको की उपलब्धियों का श्रेय बालको परिवार के प्रत्येक सदस्य को जाता है।

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नई दिल्ली

पीईएसबी ने एसजेवीएन के निदेशक (कार्मिक) के रूप में श्री अजय कुमार शर्मा की संस्तुति की

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नई दिल्ली । सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) ने विद्युत मंत्रालय के तहत अग्रणी सार्वजनिक उपक्रम एसजेवीएन के निदेशक (कार्मिक) पद के लिए अजय कुमार शर्मा की संस्तुति की है। 24 मई, 2024 को आयोजित साक्षात्कार की एक जटिल प्रक्रिया के बाद उनका चयन किया गया, जहां वे ग्यारह दावेदारों के बीच शीर्ष उम्मीदवार के रूप में उभरे। श्री शर्मा वर्तमान में एसजेवीएन के कॉर्पोरेट मानव संसाधन विभाग में महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। अजय कुमार शर्मा अक्टूबर 2009 में एसजेवीएन में शामिल हुए और तब से शिमला में कॉर्पोरेट मुख्यालय में मानव संसाधन विभाग में कार्यरत हैं। उनका योगदान कार्मिक योजना, प्रशासन, औद्योगिक संबंध और कल्याण, मानव संसाधन नीति, प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास और मानव संसाधन क्रय सहित मानव संसाधन के विभिन्न क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इसके अलावा, उन्होंने एसजेवीएन के निदेशक (कार्मिक) और अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक की सहायता की है। एसजेवीएन में शामिल होने से पहले, उन्होंने 1996 से 2009 तक स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में कार्य किया। 8 अप्रैल, 1974 को जन्मे अजय कुमार शर्मा चम्बा जिले के सिहुंता उपमंडल के खरगट गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने कोयंबटूर के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री, इग्नू से मानव संसाधन में एमबीए और एक्सएलआरआई जमशेदपुर से मानव संसाधन प्रबंधन (एचआरएम) में कार्यकारी विकास पाठ्यक्रम पूरा किया है।

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नई दिल्ली

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) संधि, भारत और विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के लिए एक बड़ी जीत

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नई दिल्ली । बौद्धिक संपदा, आनुवंशिक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान पर विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) संधि, विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) और भारत, जो पारंपरिक ज्ञान और ज्ञान की प्रचुरता के साथ एक मेगा जैव विविधता हॉटस्पॉट है, के लिए एक उल्‍लेखनीय जीत है। पहली बार ज्ञान और बुद्धिमत्ता की वह प्रणाली, जिसने सदियों से अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और संस्कृतियों की सहायता की है, अब वैश्विक आईपी प्रणाली में शामिल हो गई है। पहली बार स्थानीय समुदायों और उनके जीआर और एटीके के बीच संबंध को वैश्विक आईपी समुदाय में मान्यता मिली है। ये पारंपरिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रदाता और जैव विविधता के भंडार के रूप में भारत द्वारा लंबे समय से समर्थित ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं। यह संधि न केवल जैव विविधता की रक्षा और सुरक्षा करेगी बल्कि पेटेंट प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगी और नवोन्‍मेषण को सुदृढ़ करेगी। इसके माध्यम से, आईपी प्रणाली सभी देशों और उनके समुदायों की आवश्‍यकताओं को पूरी करते हुए अधिक समावेशी तरीके से विकसित होते हुए नवोन्‍मेषण को प्रोत्साहित करना जारी रख सकती है। यह संधि भारत और विकासशील देशों के लिए भी एक बड़ी जीत का प्रतीक है जो लंबे समय से इस माध्‍यम का समर्थक रहा है। दो दशकों की वार्ता और सामूहिक समर्थन के बाद इस संधि को 150 से अधिक देशों की आम सहमति से बहुपक्षीय मंचों पर अपनाया गया है। अधिकांश विकसित देशों, जो आईपी सृजित करते हैं और अनुसंधान तथा नवोन्‍मेषण के लिए इन संसाधनों और ज्ञान का उपयोग करते हैं, के इसमें शामिल होने से यह संधि आईपी प्रणाली के भीतर परस्पर विरोधी प्रतिमानों को पाटने और दशकों से विद्यमान जैव विविधता की सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करती है।अनुसमर्थन पर संधि और लागू होने के लिए अनुबंध करने वाले पक्षों को पेटेंट आवेदकों के लिए आनुवंशिक संसाधनों के मूल देश या स्रोत का खुलासा करने के लिए तब अनिवार्य प्रकटीकरण दायित्वों की आवश्यकता होगी, जब प्रतिपादित आविष्कार आनुवंशिक संसाधनों या संबंधित पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हो। यह भारतीय जीआर और टीके को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा, जिनके वर्तमान में भारत में संरक्षित होने के बावजूद उन देशों में दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है, जिनके पास दायित्वों का खुलासा करने की बाध्‍यता नहीं है। इसलिए, उद्भव बाध्‍यताओं के प्रकटीकरण पर वैश्विक मानकों का सृजन करने के द्वारा, यह संधि आनुवंशिक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान के प्रदाता देशों के लिए आईपी प्रणाली के भीतर एक अभूतपूर्व संरचना का निर्माण करती है। वर्तमान में, केवल 35 देशों में किसी न किसी रूप में प्रकटीकरण बाध्‍यताएं हैं, जिनमें से अधिकांश अनिवार्य नहीं हैं और उनके पास प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उचित प्रतिबंध या उपाय नहीं हैं। इस संधि के लिए विकसित देशों सहित अनुबंध करने वाले पक्षों को पेटेंट आवेदकों पर मूल बाध्‍यताओं के प्रकटीकरण को लागू करने के लिए अपने विद्यमान कानूनी संरचना में बदलाव लाने की आवश्यकता होगी। यह संधि सामूहिक विकास अर्जित करने और एक स्थायी भविष्य, जिसका भारत ने सदियों से समर्थन किया है, का वादा पूरा करने की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।

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Business

एनटीपीसी कोरबा में बालिका सशक्तिकरण मिशन 2024

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कोरबा । श्रीमती रोली खन्ना, अध्यक्ष मैत्री महिला समिति ने एनटीपीसी कोरबा में शामिल होने के अपने पहले दिन एनटीपीसी कोरबा की जीईएम लड़कियों से बातचीत की और 123 जीईएम लड़कियों को नाइट सूट वितरित किए।N25 मई 2024 को, श्रीमती रोली खन्ना, अध्यक्ष मैत्री महिला समिति ने श्रीमती कस्तूरी मैत्रा, श्रीमती मीता भट्टाचार्य, श्रीमती कीर्ति साठे और मैत्री महिला समिति (एमएमएस) की अन्य सदस्यों के साथ ईडीसी, कोरबा का दौरा किया। काफिले ने जीईएम लड़कियों से बातचीत की और उन्हें अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाने के लिए शिक्षित किया। सभी जीईएम लड़कियों को उनके आरामदायक नाइटवियर के रूप में नाइट सूट उपहार में दिए गए और उनके चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी। मैत्री महिला समिति ने लड़कियों को खुद के बारे में विशेष महसूस कराया। जीईएम लड़कियों के साथ उनकी समावेशी भागीदारी उन्हें दिन-प्रतिदिन बेहतर और बेहतर बनने और दुनिया में एक बेहतर इंसान बनने और सफलता और खुशी के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है, लड़कियाँ बदलाव लाती हैं। 27 मई 2024 को, एनटीपीसी कोरबा ने बैच 2024 की जीईएम लड़कियों के लिए रविवार अभ्यास के रूप में एक अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित की। शिक्षकों और अभिभावकों के बीच यह बातचीत जीईएम लड़कियों की प्रगति के बारे में बात करने में मदद करती है। जीईएम लड़कियों के माता-पिता इस बैठक को बहुत उपयोगी और सकारात्मक पाते हैं क्योंकि यह अवसर उन्हें सवाल पूछने और विचार साझा करने का एक मंच प्रदान करता है ताकि माता-पिता और शिक्षक लड़कियों की सीखने और प्रगति की यात्रा में भागीदार बन सकें। सत्र ने न केवल लड़कियों को प्रेरित किया बल्कि उनकी शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया। उसी दिन शाम को, जीईएम लड़कियों को एक फिल्म देखने के लिए अंबेडकर भवन भी ले जाया गया। उन्होंने ‘फाइंडिंग निमो’ देखी और इसका भरपूर आनंद लिया और उनके चेहरे शरारती खुशी से चमक उठे।

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