
संदीप लाल और मैगी प्रसाद ने वर्तमान प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप, अतुल आर्थर गुट ने कहा – “हाईकोर्ट ने हमारी समिति को माना वैध”
मुंगेली/रायपुर। छत्तीसगढ़ डायोसिस एवं छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। रेम्बो मेमोरियल हायर सेकेंडरी इंग्लिश मीडियम स्कूल मुंगेली के प्रबंधन, कर्मचारियों की बर्खास्तगी, चुनाव प्रक्रिया, बैंक खातों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अब दोनों पक्ष खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर वर्तमान प्रबंधन समिति स्वयं को वैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट से राहत मिलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रबंधन और कर्मचारियों से जुड़े पदाधिकारियों ने स्कूल संचालन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
इसी कड़ी में रेम्बो स्कूल के को-मैनेजर संदीप लाल और सीनियर मैनेजर मैगी प्रसाद ने प्रेस के समक्ष अपनी बात रखते हुए कई प्रशासनिक और वित्तीय सवाल उठाए हैं। दोनों पदाधिकारियों ने दावा किया कि स्कूल और डायोसिस बोर्ड से जुड़े मामलों में नियमों की अनदेखी की गई तथा कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों की उपेक्षा हुई है।
स्कूल प्रबंधन को लेकर बढ़ा टकराव
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के अधीन प्रदेश में लगभग 19 स्कूल संचालित हैं। इन्हीं में शामिल रेम्बो मेमोरियल हायर सेकेंडरी इंग्लिश मीडियम स्कूल मुंगेली का विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है।
को-मैनेजर संदीप लाल ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन में लगातार हस्तक्षेप किया गया और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना प्रशासनिक निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारियों और शिक्षकों को बिना उचित कारण नोटिस देकर हटाया गया, जिससे स्कूल का वातावरण प्रभावित हुआ।
उन्होंने दावा किया कि वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को अचानक निलंबित और बर्खास्त करना न केवल श्रम कानूनों के विपरीत है बल्कि इससे शिक्षकों और कर्मचारियों में भय का माहौल बना है।
“35 कर्मचारियों को बिना प्रक्रिया हटाया गया”
सीनियर मैनेजर मैगी प्रसाद ने कहा कि लगभग 35 शिक्षकों और कर्मचारियों को जिस तरह हटाया गया, उससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि कई कर्मचारी 20 से 30 वर्षों से सेवाएं दे रहे थे, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों ने पीएफ जमा करने, वेतन भुगतान और सेवा संबंधी अधिकारों की बात उठाई, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मैगी प्रसाद ने कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
चुनाव प्रक्रिया और समिति की वैधता पर सवाल
संदीप लाल और मैगी प्रसाद ने समिति गठन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रशासकीय अवधि समाप्त होने के बाद जिस तरह चुनाव कराए गए, उस पर कई पक्षों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा कि मामला हाईकोर्ट और रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी पक्ष द्वारा स्वयं को पूर्ण रूप से वैध घोषित करना उचित नहीं है।
दोनों पदाधिकारियों ने दावा किया कि धारा 27 के तहत वैधानिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी हुए बिना प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं।
बैंक खाते और वित्तीय लेनदेन पर उठे सवाल
विवाद के बीच स्कूल के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। संदीप लाल ने कहा कि स्कूल के खातों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से शिक्षकों के वेतन, पीएफ जमा और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए।
उन्होंने मांग की कि स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और खातों की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि करोड़ों रुपये के लेनदेन की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
वहीं दूसरी ओर वर्तमान प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष अतुल आर्थर ने पूर्व प्रबंधन पर लगभग 30 से 35 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वित्तीय रिकॉर्ड की जांच होने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे।
पूर्व प्राचार्य पर दस्तावेज ले जाने के आरोप
वर्तमान प्रबंधन की ओर से पूर्व प्राचार्य सोफिया जे. हैरिसन पर स्कूल के महत्वपूर्ण दस्तावेज, कैशबुक, लेजर, बिल-वाउचर और प्रशासनिक रिकॉर्ड अपने साथ ले जाने के आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि विरोधी पक्ष का कहना है कि इस मामले में तथ्यों को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
“हाईकोर्ट ने वर्तमान समिति को माना वैध” : अतुल आर्थर
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन के उपाध्यक्ष अतुल आर्थर ने प्रेस वार्ता में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्तमान समिति को वैध माना है और विरोधी पक्ष को किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा कि 13 दिसंबर 2025 को दायर अपील का निस्तारण किया जा चुका है और वर्तमान समिति विधिवत कार्य कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग स्कूलों में भ्रम और अस्थिरता का माहौल बना रहे हैं।
अतुल आर्थर ने यह भी कहा कि स्कूल का संचालन नियमित रूप से जारी रहेगा तथा विद्यार्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
“अभिभावक अफवाहों पर ध्यान न दें”
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अभिभावकों और विद्यार्थियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान प्रबंधन ने अभिभावकों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है, वहीं विरोधी पक्ष ने पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन और शिक्षा विभाग से जांच की मांग
पूरा मामला अब मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, कलेक्टर, शिक्षा विभाग और रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग तक पहुंच चुका है। विभिन्न पक्षों द्वारा मांग की जा रही है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो और कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा अभिभावकों के हित सुरक्षित रह सकें।
