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नई दिल्ली

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) संधि, भारत और विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के लिए एक बड़ी जीत

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नई दिल्ली । बौद्धिक संपदा, आनुवंशिक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान पर विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) संधि, विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) और भारत, जो पारंपरिक ज्ञान और ज्ञान की प्रचुरता के साथ एक मेगा जैव विविधता हॉटस्पॉट है, के लिए एक उल्‍लेखनीय जीत है। पहली बार ज्ञान और बुद्धिमत्ता की वह प्रणाली, जिसने सदियों से अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और संस्कृतियों की सहायता की है, अब वैश्विक आईपी प्रणाली में शामिल हो गई है। पहली बार स्थानीय समुदायों और उनके जीआर और एटीके के बीच संबंध को वैश्विक आईपी समुदाय में मान्यता मिली है। ये पारंपरिक ज्ञान और बुद्धिमत्ता के प्रदाता और जैव विविधता के भंडार के रूप में भारत द्वारा लंबे समय से समर्थित ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं। यह संधि न केवल जैव विविधता की रक्षा और सुरक्षा करेगी बल्कि पेटेंट प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगी और नवोन्‍मेषण को सुदृढ़ करेगी। इसके माध्यम से, आईपी प्रणाली सभी देशों और उनके समुदायों की आवश्‍यकताओं को पूरी करते हुए अधिक समावेशी तरीके से विकसित होते हुए नवोन्‍मेषण को प्रोत्साहित करना जारी रख सकती है। यह संधि भारत और विकासशील देशों के लिए भी एक बड़ी जीत का प्रतीक है जो लंबे समय से इस माध्‍यम का समर्थक रहा है। दो दशकों की वार्ता और सामूहिक समर्थन के बाद इस संधि को 150 से अधिक देशों की आम सहमति से बहुपक्षीय मंचों पर अपनाया गया है। अधिकांश विकसित देशों, जो आईपी सृजित करते हैं और अनुसंधान तथा नवोन्‍मेषण के लिए इन संसाधनों और ज्ञान का उपयोग करते हैं, के इसमें शामिल होने से यह संधि आईपी प्रणाली के भीतर परस्पर विरोधी प्रतिमानों को पाटने और दशकों से विद्यमान जैव विविधता की सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करती है।अनुसमर्थन पर संधि और लागू होने के लिए अनुबंध करने वाले पक्षों को पेटेंट आवेदकों के लिए आनुवंशिक संसाधनों के मूल देश या स्रोत का खुलासा करने के लिए तब अनिवार्य प्रकटीकरण दायित्वों की आवश्यकता होगी, जब प्रतिपादित आविष्कार आनुवंशिक संसाधनों या संबंधित पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हो। यह भारतीय जीआर और टीके को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा, जिनके वर्तमान में भारत में संरक्षित होने के बावजूद उन देशों में दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है, जिनके पास दायित्वों का खुलासा करने की बाध्‍यता नहीं है। इसलिए, उद्भव बाध्‍यताओं के प्रकटीकरण पर वैश्विक मानकों का सृजन करने के द्वारा, यह संधि आनुवंशिक संसाधनों और संबंधित पारंपरिक ज्ञान के प्रदाता देशों के लिए आईपी प्रणाली के भीतर एक अभूतपूर्व संरचना का निर्माण करती है। वर्तमान में, केवल 35 देशों में किसी न किसी रूप में प्रकटीकरण बाध्‍यताएं हैं, जिनमें से अधिकांश अनिवार्य नहीं हैं और उनके पास प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उचित प्रतिबंध या उपाय नहीं हैं। इस संधि के लिए विकसित देशों सहित अनुबंध करने वाले पक्षों को पेटेंट आवेदकों पर मूल बाध्‍यताओं के प्रकटीकरण को लागू करने के लिए अपने विद्यमान कानूनी संरचना में बदलाव लाने की आवश्यकता होगी। यह संधि सामूहिक विकास अर्जित करने और एक स्थायी भविष्य, जिसका भारत ने सदियों से समर्थन किया है, का वादा पूरा करने की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।

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नई दिल्ली

“ONGC and Indian Oil Forge Strategic Partnership to Establish LNG Plant Near Hatta Gas Field

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New Delhi । ONGC and IndianOil Corporation Limited (IOCL) signed a memorandum of understanding (MoU) to establish a small-scale Liquefied Natural Gas (LNG) plant near the Hatta Gas Field in the Vindhyan Basin on 17 June 2024. The establishment of the Hatta LNG plant will significantly enhance the Vindhyan Basin’s status, upgrading it from a Category II to a Category I Basin.

The MoU signing ceremony took place at Deendayal Urja Bhawan, New Delhi, attended by Director (Planning & Business Development) IOCL, Sujoy Chaudhary and Director (Exploration) ONGC, Sushma Rawat

The plant will utilize cutting-edge technology to produce LNG, a cleaner alternative to traditional fossil fuels, significantly reducing carbon emissions and aligning with India’s climate change mitigation goals.

The discovery at Hatta represents the culmination of five decades of sustained exploration efforts. ONGC has already submitted its Field Development Plan (FDP) to the Directorate General of Hydrocarbons (DGH) to monetize its assets in the Hatta area.

The ‘non-binding MoU’ for a Technology Demonstration Small Scale LNG plant at Hatta, Madhya Pradesh’ between ONGC and Indian Oil is a visionary step towards a sustainable and prosperous future for India.

As the nation advances on its path to energy self-sufficiency, the Hatta LNG plant will stand as a symbol of innovation, collaboration, and unwavering commitment to a greener tomorrow.”

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नई दिल्ली

खनन मंत्रालय ने स्वयं और समाज के लिए योग विषय पर 10वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया।

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नई दिल्ली । खनन मंत्रालय ने नई दिल्ली में योग के लिए स्वयं और समाज के लिए योग विषय पर 10वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया। खनन मंत्रालय के सचिव वी.एल. कांता राव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। वी.एल. कांता राव ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के महत्व के बारे में बात की और सभी प्रतिभागियों को अपने जीवन को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिदिन योग का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम की शुरुआत एक संक्षिप्त उद्घाटन समारोह से हुई, जिसके बाद आयुष मंत्रालय के अनुसार योग प्रोटोकॉल का पालन किया गया। 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसकी शुरुआत के बाद से, 2015 से 21 जून को हर साल दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग के महत्व पर प्रकाश डालता है। योग के लाभों के बारे में अपने कर्मचारियों के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से, खान मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया।

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नई दिल्ली

योग भारत का दुनिया को दिया गया अनमोल उपहार है, जो सद्भाव और संतुलन के अपने सिद्धांतों के माध्यम से लोगों और संस्कृतियों को एकजुट करता है”: केन्द्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी

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नई दिल्ली । भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में बीएचईएल टाउनशिप में 10वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया। भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने मंत्रालय में सचिव कामरान रिजवी, मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले सीपीएसई निदेशकों, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के साथ योग सत्र में भाग लिया।केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “योग भारत की ओर से दुनिया को दिया गया अनमोल उपहार है, जो सद्भाव और संतुलन के अपने सिद्धांतों के माध्यम से लोगों और संस्कृतियों को एकजुट करता है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास किया है, जो भारत की संस्कृति और विरासत को गर्व से प्रदर्शित करता है। मैं इस महान प्रयास के लिए अपनी हार्दिक बधाई देता हूं।

योग आत्मविश्वास को बढ़ाकर, मन को नियंत्रित करने में मदद करके और मन और शरीर दोनों को तरोताजा करके व्यक्ति और समाज दोनों को लाभ पहुंचाता है। रोजाना योग का अभ्यास करने से हम ऊर्जावान रहते हैं और समग्र कल्याण को बढ़ावा मिलता है।” “उन्होंने यह भी कहा कि, “योग का इतिहास हजारों साल पुराना है और यह मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक रहा है। योग का संदर्भ ऋग्वेद में पाया जा सकता है, जो भारतीय संस्कृति में इसकी गहरी जड़ों को दर्शाता है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक सच्चे योगी हैं, जिनके जीवन में योग का सार समाहित है। उनका समर्पण और जुनून आज के युवाओं को प्रेरित करता है और योग की परिवर्तनकारी शक्ति को प्रदर्शित करता है।” वर्ष 2015 से हर साल 21 जून को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल योग का जश्न मनाता है बल्कि भारत की संस्कृति और विरासत को भी उजागर करता है। योग को वैश्विक स्तर पर अपनाना दुनिया के लिए आध्यात्मिक गुरु के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है।

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